कश्मीर में क्या हो रहा है ... क्या होने वाला है? Featured

Saturday, 03 August 2019 00:00 Written by  Bipin Kumar Tiwari Published in Nation

कश्मीर में क्या हो रहा है यह तो दिख रहा है लेकिन मुख्य बिषय यह है की कश्मीर में क्या होने वाला है और सच कहा जाए तो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल एवं कुछ वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारियों के अलावा किसी को भी कुछ मालूम नही है। सबको यही मालूम है की कुछ होने वाला है, सब सिर्फ अनुमान लगा रहे है और अपनी अपनी पतंगें उड़ा रहे है।

कश्मीर में एक असमान्य स्थिति पैदा हो गयी है। श्री अमरनाथ यात्रा रोक दी गयी है, यात्रियों एवं पर्यटकों को कश्मीर से चले जाने के लिए कह दिया गया है, पिछले एक सप्ताह में लगभग चालीस हजार अतिरिक्त अर्धसैनिक कश्मीर भेजे जा चुके है. सेना एवं वायुसेना सतर्क है।

कश्मीर में क्या हो रहा है यह तो दिख रहा है लेकिन मुख्य बिषय यह है की कश्मीर में क्या होने वाला है और सच कहा जाए तो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल एवं कुछ वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारियों के अलावा किसी को भी कुछ मालूम नही है। सबको यही मालूम है की कुछ होने वाला है, सब सिर्फ अनुमान लगा रहे है और अपनी अपनी पतंगें उड़ा रहे है।

जो कुछ भी हो रहा है वह सामान्य एवं साधारण तो बिलकुल नहीं है। कुछ बहुत बड़ा जरूर पक रहा है। कयासों का बाज़ार गर्म है। लेकिन जो भी होगा बड़ा होगा।

35A एवं 370 को हटाना की बात करे तो 35A को हटाना तो आसान है क्योंकि यह राष्ट्रपति के आदेश से हटाया जा सकता है। लेकिन 370 को हटाना मुश्किल है क्योंकि इसके लिए संविधान संसोधन करना होगा ।

जम्मू एवं कश्मीर को तीन भागों में बाट कर तीन केंद्र शासित प्रदेश जम्मू, कश्मीर एवं लद्धाख बनाने की संभावना भी जताई जा रही है। यह सबसे आसान है और प्रभावशाली भी। क्योंकि संसद में एक साधारण बिल द्वारा इसे किया जा सकता है और कश्मीर की स्थानीय नेताओं एवं पार्टीयो की दुकानदारी एवं ब्लैकमेलिंग भी बंद हो जाएगी। एक बार अगर जम्मू एवं कश्मीर तीन केन्द्र शासित प्रदेशों में बटते ही अनुच्छेद 370 एवं 35A का अस्तित्व भी ख़त्म हो जायेगा क्योकि जब राज्य, राज्य विधानसभा एवं राज्य सरकार ही नहीं होंगे तो अनुच्छेद 370 एवं 35A लागु कैसे होगा?  

बड़ी संख्या में सुरक्षाबलों की तैनाती का एक कारण यह भी हो सकता है कि अभी कश्मीर में आतंकी एवं हुर्रियत की कमर टूटी हुई हैं और सरकार इसरायल की तरह हाउस टू हाउस जाकर काम्बिंग ऑपरेशन चलाकर आतंकवादियों का समूल सफाया करने की सोच रही हो।

लेकिन पूरे मसले का एक और आयाम है जो बहुत महत्वपूर्ण है और वह है अफगानिस्तान। अमेरिका हर हाल में जल्द से जल्द अफगानिस्तान से निकलना चाह रहा है। उसी कड़ी में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान एवं सेना अध्यक्ष जनरल बाजवा की हाल की अमेरिका यात्रा भी है। इमरान खान अमेरिका को अफगानिस्तान में मदद की बहुत सारे वायदे करके आए हैं जिससे अमेरिका तालिबान एवं हक्कानी नेटवर्क जैसे आतंकी संगठनों से किसी तरह समझौता कर अफगानिस्तान से जल्द से जल्द निकल सके। इसके चलते अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने कश्मीर को लेकर विवादित ब्यान भी दिया। पाकिस्तान जानता है कि ट्रम्प जल्दी में है। अगले साल अमेरिका में चुनाव है और राष्ट्रपति ट्रम्प हर हाल में उससे पहले अफगानिस्तान से निकलना चाह रहे हैं। वैसे पाकिस्तान ने आजतक अमेरिका से किये अपने किसी भी वायदे को पूरा नही किया है। भारतीय रणनीतिकारो एवं खुफिया एजेंसियों का मानना है कि इससे पहले की अमेरिका पाकिस्तान से अफगानिस्तान पर परिणाम मांगे वह कश्मीर में कुछ बड़ा कर भारत - पाकिस्तान के बीच बड़े तनाव को कारण बताकर अमेरिका को बीच बचाव के लिये आगे आने पर मजबूर करने की कोशिश कर सकता है। वह स्थिति पाकिस्तान के लिए सबसे सुखद होगी। भारत की दिक्कत यह है कि 2016 में सर्जिकल स्ट्राइक एवं 2019 में एक कदम और आगे बढ़कर बालाकोट एयर स्ट्राइक करने के बाद अगर अभी पाकिस्तान कोई हरकत करता है तो भारत के पास बड़ा जबाब देने के अलावा कोई और विकल्प बचता नही है। और वह पूर्ण युद्ध का रूप भी ले सकता है।

हो सकता है इसी कारण से बड़ी संख्या में अर्धसैनिक बलों की तैनाती की जा रही हो जिससे सेना को अंदर से हटाकर LoC पे तैनात किया जा सके।

दिक्कत ये है कि अगर सरकार खुफिया सूचना पर सतर्कता बरतते हुए बड़ा कदम उठाती है तो डर एवं भय का माहौल पैदा करने का आरोप लगता है और अगर कुछ अनहोनी हो जाता है तो खुफिया जानकारी के बावजूद जरूरी एहतियात न बरतने का आरोप।

जो भी हो अगर खुफिया जानकारी है तो सरकार को उस पर करवाई करते हुए आवश्यक कदम जरूर उठाना ही चाहिये। 

अगले कुछ सप्ताह कश्मीर के लिए काफी महत्वपूर्ण होने जा रहे है।